Sunday, February 3, 2019

बूंद की आस्था

समंदर की एक लहर से कई बूंदो ने जन्म लिया। 
एक बूंद ने हिम्मत जुटाई और लहर से पूछ लिया।।

"माँ, यह गीला क्या होता है ?

कैसा दीखता है, कहाँ रहता है ?

लहर ने समझाया, बूंद को बहलाय। 

गीला का न रंग है, न कोई आकर है।।
यह तो एक अहसास है, एक भाव है। 
"गीला" तो "पानी" का अहम स्वाभाव है।।

मिलने को "पानी" से अब यह नादान बेचैन सी रहती है। 

समंदर की एक बूंद समंदर मै "पानी" को ढूंढती है।। 


Thursday, September 20, 2018

इंसान की फितरत

इंसान बने क्रूर तो उसे जानवर कहते है । 
यह बेज़ुबान तो यूँही बदनाम होते है ।।

अब समज आया क्यों साधु जंगल में तपस्या करते थे ।
छोड़ कर मंदिर तीरथ क्यों जंगल को चुनते थे ।।

दया की सिख बस वहीं मिलती है ।
इंसानो की बस्ती मै बस घृणा पलती है ।।

हर देव का एक वाहन होता है ।
गणेश का मूषक, विष्णु का गरुड़ और माता का शेर होता है ।।

इंसान की फ़ितरत बस वही समज पाया ।
शायद, इसीलिए किसिने इंसान को वाहन नहीं बनाया ।।

आत्म-भक्ति

मंदिर, मूरत और छबि  में भक्ति  नज़र न आई।
जब झाँका अंतर में मैंने पावन ज्योत है पाई ।।

Sunday, May 20, 2018

कर्मो का हिसाब

कुछ खुशियाँ अभी और आनी है।
कुछ ग़मोका भुगतना अभी बाकि है।।

यूहीं नहीं चलरही है साँसे।
कुछ कर्मो का हिसाब अभी बाकि है।।

Tuesday, May 15, 2018

पत्थर की आह

पत्थर अगर कुछ कहता। 
अपना दुःख बयां करता।।

कई जगह से तोडा मुझको। 
घिस कर कई खरोच है पायी।। 

न जाने क्या क्या गुजरी है मुझपे। 
न जाने कितनी चोट है खायी।।

तब जाके इंसान को मुझमे ,
भगवान की मूरत नझर है आयी।।

मै तो हूँ पत्थर, तू इंसान कहलाता है।।
देता है दर्द जिसको,उसीकी इबादत करता है ! ! !

मेरी आह न सुनी तूने, अब गुहार लगता है।।
दुआएं कुबूल करलु तेरी, मुझसे यह उम्मीद रखता है ? ? ? 
  

Monday, April 16, 2018

एक फरियाद

🙏 एक फरियाद 🙏

माना तू  भगवान है।
पर अपनी ही दुनिया से अनजान है 

कुछ असर कलियुग का तुजपार भी हुआ होगा ।
वरना "यदा यदा हि धर्मस्य ...... "  कहने वाला,
क्या यूँही अपना वचन भूला होगा ।।

अपने वचनकी गर लाज रखलेता। 
तेरे सामने यह अत्याचार न होता ।। 

इस पाप को गर चुपचाप न देखता। 
अपने होनेका कुछ प्रमाण तो देता ।।

माना अब इंसानियत नहीं रही। 
पर तेरी खुदाई कहाँ खोगई ।।

अब भी न आया तू  , तो यह जहाँ "अनाथ" कहलायेगा। 
अबतक था "रणछोड़" अब तू "जगछोड़" कहलायेगा ।।


Friday, March 30, 2018



मोत से क्या डरना
      कई बार मर लिए।

डर तो ज़िन्दगी का है
      कहीं फिरसे ना मिले।।